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जनतंत्र हमारा, देश का प्यारा

हमसब का नारा
जग से न्यारा

(डा० जी० भक्त)

कवि प्रभात का कथन है:-
सादगी स्वतंत्रय सेवा मंत्र है।
भारती भारत भरत ये तंत्र है।
तन वचनमन ये अनोखे यंत्र है।
जो अन्हें भूले वहीं परतंत्र है।।

हमें गर्व अनुभव होता है उपरोक्त भाव व्यंजना पर, जिसे भारत बासियों का स्वर देकर कवि श्रेष्ठ ने देश को गौरवान्वित किया है।

अब हमें सोचना है कि यह जनतंत्र कोई भावना मात्र है, सम्भावना है या कल्पना है तो वह साकार कर लिया जाय।

हमें 1947 में स्वतंत्रता मिली। 1592 की 26 जनवरी को सब भारत बासी हर वर्ष उत्साह और श्रद्धा से गणतंत्र मानते हैं। क्या हम कह सकते है हमारा उपरोक्त लक्ष्य या संकल्प इन 71 वर्षों की लम्बी अवधि पूरी कर किन लक्ष्यों को हम फलित पायें हाँ आज हम परतंत्र तो नहीं किन्तु हमारा जनतंत्र कमजोरी की ओर पिछड़ता जा रहा जरूर है। यहाँ तक कि अबतक जनता इस विन्दु पर मुखर नहीं रही है। प्रायः चुनावों के परिणाम में विजय श्री पाकर चहल कदमी करते कौन है ? वे है जो जनतंत्र और परतंत्र की परिभाषा को हृदय में अब तक स्थान नहीं चहल करनी दे पाये। अब आती है कि जनता परिवर्तन चाहती है। क्या यह वास्तविकता नहीं ?

अगर हम समाचार पत्रों की माने तो राजनैतिक दलों और भिडियावालों द्वारा जो भावनात्मक अभिव्यक्ति पाते हैं और चुनाव के परिणाम के बाद का विचार मंथन क्या बतलाता है जिससे कभी- कभी गणतंत्र में भूचल आते दिखते हैं। हम जनता इन विषयें को लेकर राजनीति करना नहीं चाहते। सूदृढ़ जनतंत्र स्वतंत्रता को संरक्षण प्रदान कर सकता है। राष्ट्रीयता उपरोक्त आयाम के साथ सामाजिक सरोकार एवं जन आकांक्षाओं का आदर के साथ जनता में भी न्यायोचित विचार धारा को उर्जा प्रदान करना अपेक्षित होगा जो अबतक नहीं हो पाया।

सच पूछें तो इस परिप्रेक्ष्य में हमारी सरकार भी किंकर्तव्य विमूढ़ दिखती है। राष्ट्रीय एकता पर भी कभी कभी दलों में मतभेद तो कभी जन आक्रोश आदि प्रखर पाये जाते हैं। देश की विविधता भी एक कारण बनती है। किन्तु हमारी जनशक्ति में अगर एकता के साथ राष्ट्र भक्ति का प्रवाह जागृत पाया जाय, साथ ही सब प्रकार की आपात बाधायें नियंत्रित हो तो हमारा देश जंग से प्यारा बनकर खड़ा होगा। उस दिन का हमारा जनतंत्र का तिरंगा भागीरथी गंगा की लहरों के साथ लहरायेगा।

सर्व भावेन समर्पित ! 2024 की 26 जनवरी के उपलक्ष में!!

जय हिन्द !!!

By admin

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