दिनांक 14 मार्च 2025 ई० होली त्योहार
त्योहार मनते है। खुशियाँ मनाई जाती है। इस दिन भी किसी के घर मृत्यु की घटना घटती है। पर्व नही मनते, दुख मनाते, शोक मानते है।
आज भी दुनियाँ के कई देशों में युद्ध चल रहा है। संघर्ष चल रहा है। सब दिन युद्ध और शान्ति के तान-बाने रचाये जाते ही रहते है। खाने-खेलने-खुशी मनाने का क्षण कब नही, हर क्षण चल ही रहा ह। दुःख तो मनुष्य स्वयं रचता है, अथवा अकस्मात घटनाएँ घट जाती है। मनुष्य का काम है सोचना, विचारना समाधान निकालना, जो सब दिन चलता रहता है। विचारों की श्रृंखला में कदाचित विभेद पैदा होना सहज संभव है किन्तु भोगनी पड़ी है। युक्तियाँ और प्रयास तो नियति है। समाधान का कोई खास काल सुनिश्चित नही। अतः सफलता मिलने पर खुशी का प्रवाह उत्साह लाता ही है।
ऐसा ही कभी हुआ था बाप बेटे के बीच तनाब। अहंकार और अज्ञानता का संघर्ष आँधी बन कर आया और ज्ञान की सत्यता पर धूल डालने लगा। प्रह्मद और हिरण्यकशिपु (बाप बेटे के बीच) अहंकार समन्वय नहीं बैठने दे पाया, कारण तो अज्ञानता थी। राज सत्ता का अभिमान ज्ञान को परास्त करना चाहता था। सत्यता बेटे में थी। समय बितता जाता था, रचनाए रची जा रही थी। एक समय आया। धूल भरी आँधी पर बज्ज पात हुआ। दानवी प्रवृति के दमन के लिए दैवी शक्ति उग्र हुयी। समाधान निकल गया। अज्ञानता और अहंकार सामने से ओझल मात्र हुआ। खुशियाँ छायी। उमंग छाया, उन्भाव में त्योहार मनाया गया। आज भी अहंकार है उसका नाश नही हुआ। अज्ञानता आज भी है। ज्ञान पर ये दोनों दानवी शक्तियाँ आज भी भारी पड़ रही। विकाश की वर्षा तावर-तोड़ चल रही है। मुख्यमंत्री जी का उत्साह विकाश यात्रा को जोश भर रहे है। ज्ञान की गुणवत्ता में गिरावट जो आयी, वह जाने वाली नहीं आखिर गुणात्मक प्रयास हो नही पा रहा। मानवता में स्मार्टनेश और कार की तेज रफ्तार तो डिजल पेट्रौल के धुएँ ही न छोड़ पायेंगे. …….भाई! होली हमारी वैसी न मने. आडम्बर को छोड़ मानवता लाओ, ज्ञान भरो, उसे व्यवहार में लाओ कि उसका प्रकाश फैल, गुणवगुण की पहचान बने। राज मार्ग पर हमारी गाड़ी की सुरक्षा और विकास की झलक मिले। पोस्ट र्माटम नहीं शिक्षा के सुधार, चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व का विकास, कौशल में सफल, कर्म में निष्ठा, स्वस्थ्ता में निरोगता, तब जनकल्याण में सकारात्मकता का प्रति फलन दिखे। जन शिक्षण में अभिव्यक्ति की यथाथता जब मात्र भाषा न बन कर भाव में गुजे तब वह जनतंत्र दिवस हो या होली का त्योहार ! …कैसा लगा मेरे यार ? सुनिये सरकार इसमें चाहिए नेता सत्यवादी और वोटर इमानदार !
जय हिन्द !