Mon. Apr 13th, 2026

     नव वर्ष की शुभकामनाएं !

    सम्पूर्ण विश्व में राजनीति

    का रोमांचक खेलचल

    रहा है |लेकिन

    आहान है वैश्वीकरण और उदारीकरण का |

    उपभोगता बाद ओर मानवाधिकार को

    जब निगलता जा रहा है तो ,शुभ

    क्या औऱ कामना कैसी ?

    संत मुल्क समाज में त्याग का सर्वोच्य स्थान है|सुख का साधन संग्रह करने में जुटा मानव कभी यह सोच पता है कि जो उसकी अपनी अभिलाषा है ,वह दुसरो की भी होगी ? फिर हम अपने साथ उन्हें न शामिल करे समूह का आनंद ले ,लेकिन यह तो डिस्टनसिंग का मूलमंत्र पहले लागू है |

    डा ० जी ० भक्त

    -: कोरोना कथा-2021 की ओर :-

     

    शुभ संदेश 

     

    सुंदर लगता क्षितिज धरातल 

    पर्वत समतल सागर का तल |

    भूतल उपवन वन -धन श्यामल

     चंचल चिंतवन जन -गण, तन मन||

     

    उससे सूंदर सुधा अमरता 

    शांति प्रगति तथा समरसता |

    समृद्धि सद्भाव भरा जग 

    प्रेम भरा व्यवहार सहजता ||

     

    सबसे सुंदर सुखमय वाणी 

    सदा भोजन शीतल पानी |

    मान औऱ अपमान बराबर 

    निगत द्वेष ,वह सच्चा ज्ञानी ||

     

    विचार प्रार्थित

     

    चांद को चांदनी मुबारक आसमा को सितारे मुबारक और मेरे दोस्त हमारी तरफ से नया साल मुबारक …!

    क्षितिज उपाध्याय किशोर