Wed. Feb 1st, 2023

कोरोना विश्व युद्ध का दुसरा पक्ष

 इस उपरोक्त शीर्षक के सन्दर्भ में हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी की शब्दावली में कोरोना का जंग जीतना उनके प्रथम राष्ट्र के नाम संदेश में प्रासंगिक पाया , जिसका उद्धरण आज भी अपना औचिव्य रख रहा है । अबतक इस विश्व व्यापी लड़ाई पर हम विजय पा भी न सके थे . इसके बुझते से अंगारों से पुनः छुएँ उठने लगे , सीमा पर ताले बन्दी दीखने लगी । प्रश्न उठा कि चीन अपने को विजयी घोषित कर चुका । वह इस दिशा में चिन्तित नहीं दिख रहा । उसके संबंध में सफाई ऐसी सुनायी पड़ रही कि उस राष्ट्र की गोपनीयता अपने ढंग में बड़ा तथ्य रखता है । हमें उसको भूलकर अपनी स्थिति पर विचारना है ।
 सारे वैश्विक प्रयासों के बाद भी जब परिस्थिति बिगड़ती जा रही तो मानना होगा कि संसाधनों की खोज और प्रयासों में बदलाव के साथ अपनी सोच में विस्तार से जुटना और नवीन धारा अपनानी होगी क्योंकि हम उन प्रयासों में जिन कारणों या कमियों पर ध्यान नहीं दिया उन्हें भी साथ में जोड़ने पर विचारें ।
 रोग है तो सटीक चिकित्सा की जरुरत है । हम अपनी घिसी – पिटी व्यवस्था पर जहाँ आरोग्यकारी दवाओं की कमी , उनके हानि कर प्रभावों के बावजूद भी उनही पर निर्भरता जतायी । फिर हम उन्हें ही महत्त्व देते रहे । अन्य वैकल्पिक विधानों पर ध्यान न दे पाये । सजगता में भी कमी रही । नियमों का पालन भी पूर्णतः न हो पाया । संसाधन की कमी , चिकित्सकों में संक्रमण का भय , अपूर्ण जानकारी और प्रशिक्षण तथा निर्विभागीय कार्य कत्ताओं की सेवा से सफलता प्रभावित हुयी जो स्वाभाविक है । वैक्सिन की प्रतीक्षा और विकल्पों का अभाव साथ ही चिकित्सा प्रणाली के दोष भी इसके मुख्य कारणों में आते है ।
 डा ० हनिमैन ने एलोपैथिक दोषों को त्याग कर नवीन खोज की और निरापद पद्धति अपनायी विश्व को उनका विचार और विधान दोनों भाया प्रभाव भी तदनुरुप मिला । बड़ी संख्या में एलोपैथ होमियोपैथी को अपनाए । आज वह आरोग्यता के मामले में विश्व की आँखों में विस्तार पाया है । अपना देश भी होमियोपैथी की ओर काफी विस्तार पायी है । सरकार का भी सम्वल प्राप्त है किन्तु इस जंग में उसे उतारा नही गया । इसमें कभी अवश्य रही और सक्रियता का अभाव ही मूल कारण बना ।
 मैं होमियोपैथ होने के नाते अपने क्षेत्र में मंत्री , ( आयुष ) C.C.H. , C.C.R.H एवं H.M.A.I के अधिकारीगण से आग्रह करूंगा कि अपने सिद्धान्त और नियमों के साथ अपने होमियो चिकित्सा – शास्त्र के विधानों और अघतन उपलब्यिों के आलोक में पैण्डेमिक पर ( Covid – 19 ) Hippozainiyam तथा अन्य दवाओं पर यथा शीघ्र परीक्षण प्रारंभ कर निर्णयात्मक कदम उठाने का प्रयास करें । अपनी पैथी में सब कुछ सुन्दर और साफ – साफ सुझाया गया है । आप ही इसके अधिकारी बनाये गये हैं फिर चुप निष्क्रिय क्यों बैठे है । कल्याण करने और श्रेय पाने का अवसर है ।
 हमे गर्व है कि पिछड़ते हुए भी हम भारतवासी किसी एक छोर पर ( मृत्युदर संक्रमणदर ) के परिणामपर विश्व में आगे है । मैं एक बात विश्व को बताना चाहता हूँ कि जो दवा किसी संक्रामक रोग को आराम पहुँचाती है अथवा संक्रमण को रोकती है वही कालानतर में सर्जिकल रोग के पैदा होने और असाध्य पाये जाने का कारण बनती है । उसी का प्रभाव नष्ट करने वाली दवा के प्रयोग पर होमियोपैथ असाध्य रोगोऔं सर्जिकल रोगों को ( वैरियोलिनम ) के ग्रुप की थूजा एवं अन्य एन्टिसाइकोटिक दवा के प्रयोग से साध्य कर पाते और आरोग्य दिलाते है ।
 जो दवा रोग को दवाती है वह शरीर में स्थान पाकर उसकी क्रिया अपनी सेकेण्डरी फेज में ( प्राइमरी फेज में टॉक्सिीकोलॉजिकल प्रभाव से आगे ) साइड इफेक्ट लाती है । ऐसा एलोपैथी में स्वीकारा भी जाता है । जो आज के क्वारेन्टाइन फेज में वैसी ही दवा के प्रयोग किये जाने के कारण ही यह ( Covid – 19 ) पुन प्रभावी पाया जा रहा है । यह अवस्था रोगियों में मिश्रित प्रभाव लायेगी जो उस रोगी विशेष के शरीर में पूर्व की अचिकितिस एवं दवाओं के दुष्प्रभावजनित ( Maltreated mal manageed and i – atrogenic ) होगी उसकी चिकित्सा Therapeulically managed cleanical methodology ) की अपेक्षा रखती है । उसमें परिश्रम , साहस और प्रतिवद्धता के साथ होमियोपैथिक दवाओं की यथेष्ठ उपलब्धता चाहेगी ।
 यह जंग नही विश्व युद्ध है । इसमें हर पैथ और हर पैथी योद्धा है । सरकार इस जंग का मैनेजर और स्पोन्सर है । सरकार दोषी नही चिकित्सा पद्धति दोषी है । जो पहले ही अपने घुटने टेके जिससे भय व्याप्त हुआ ……… और वैक्सिन की प्रतीक्षा विश्व की जनसंख्या को लगी रही दः महीने हो चले । आज दूसरा युद्ध प्रारंभ है । हम कह रहे कि जनता द्वारा पालन न होना उसका कारण है । मानता हूँ उसे भी । मै तो सरकार को भी दोषी नही मानता । किन्तु सरकार की व्यवस्था और तत्परता में अनियमितता ( भगवान जाने ) अगर हुयी होगी तो सरकार दोषी हो सकती है किन्तु विपति में प्रतिक्रिया गलत होगी । हमें एक जुट और सेवा के साथ प्रतिवद्ध रहना ही मानवता को बचा पायेगा विश्व का कल्याण । संस्कृति की सुरक्षा और उसका विस्तार के साथ मानव का अस्तित्त्व धरती पर बच पायेगा ।
 मेरा आग्रह है कि उस द्वितीय विश्व युद्ध की सफलता लक्ष्य जन – गण – मन में प्रति पल गुजे तो Covid – 19 स्वतः हमारे शरीर से मन से और धरती से विदाई सम्भव होगी ।

 डा ० जी ० भक्त

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