Tue. Jan 31st, 2023

मेडिकल परिवार कल्याण समाधान ( Sterility to Fertility )

डा. जी. भक्त ( होमियो. )

समस्या थी बाँझपन की ( Primary Infertility Sule Fertility and Infertility )

CASE NO.- 1

1987 दिसम्बर , विश्वनाथ सिंह , विवाह हुए 15 वर्ष बीत गये एक बच्ची 6 वर्ष की तब से कोई बच्चा नहीं एक बार गर्भ स्राव हुआ । तब से काई गर्भ नहीं स्वास्थ्य गठन बिल्कुल सही पाया गया । पति को टी ० बो ० की बिमारी थी । पत्नी को पाँचवें माह में गर्भ साव हुआ था । स्वभाव चिड़चिड़ा था , दुखी रहा करती थी । इधर उसे leucorhoea आने लगी ।
पत्नी को SEPIA 1m की 4 खुराके सप्राह में एक बार दिया गया । पति को Tuber Culinum 1m की महीना में एकबार तीन महीना बाद गर्भाधान हुआ दवा बन्द समय पर एक स्वस्थ शिशु ( बालक ) का जन्म हुआ , जो जीवित रहा । परिवार का कल्याण , खुश और सुखी है ।

CASE NO.- 2

1975 अप्रील 13 पुरूष 36 वर्ष उम्र , पाँच संतानें मर चुकी थी । लड़के भी लड़कियाँ भी । सभी दो – दो , तीन वर्षों की वह मेरे सम्बन्धी भी थे , परिवार से जुड़े स्वयं क्रोधी स्वभाव के थे । पत्नी भी 30 वर्ष के लगभग गोरी , मोटी घमंडी और कर्मठ महिला थी । पति से प्रायः असन्तुष्ट रहती झगड़ती और मार पीट तक हो जाती कभी घर से भागकर नहर चली जाती उसे सिपिया cm शक्ति की दी गयी । पति पत्नी दोनों को महीना में चार बार नक्स वोमिका रात्रि में खाने के सुझाव के साथ दवा दे दी गयी । पुनः दो बार गर्भ नुकसान हुआ छः छः महीना का । उसके बाद भी दवा चलती रही । पुनः एक बच्चा ही जन्म लिया जो चार वर्ष में मृत्यु को प्राप्त किया , ज्वर खाँसी और फेफड़ा में सॉय – साँय को आवाज के साथ टयुवर कुलिनम 1m महीना में दो बार लगातार देता रहा । उसके डेढ़ साल बाद एक पुष्ट बालक का जन्म हुआ जो 10 वर्ष का हो चुका था । किसी गलती पर उसका क्रोधी पिता ऐसा मारा कि वह बीमार पड़ा और कष्ट के साथ मृत्यु हुयी ।
दवा का प्रयोग , चिकित्सा और सुधार के लक्षण संतोष प्रद तो थे , किन्तु होता क्या ? प्रयोग की सराहना लोग करते हैं ।

CASE NO.- 3

1985 फरवरी , छः भाइयों बाला परिवार में वह तीसरा था चार बेटियाँ जन्म लेकर काल के मुख में प्रवेश कर चुकी थी । उसन एक मेरे सज्जन मित्र से चर्चा के क्रम में कहा- क्या करें , अगर एक पुत्र हो जाता और जिन्दा रह पाता तो पत्नी का ऑपरेशन करा देते । उस मित्र ने उन्हें मुझ से मिलाया । पत्नी चार बहनों वाली थी और उसकी चार बच्ची को मृत्यु के कौर में जाना पड़ा । उसे मैनें सिफलिनम 1m की दो खुराकें दी और पति को थूजा 10m की दो खुराकें साथ – साथ बाद में Leucorhoea चालू हुआ तो सिपिया 200 शक्ति लगातार तीन माह तक चलाने का सुझाव दिया लगभग दो वर्षों के बाद पता चला कि एक लड़का जन्म लिया । उनके मनोरथ को पूर्ण सफल बनाकर कृतार्थ करने वाले भगवान ने उसका श्रेय मुझ को दिया । आज उनका परिवार सुखमय जीवन जी रहा है ।

CASE NO.- 4

हाल की बात है । एक कम्पाउण्डर की पत्नी , नाटे कद की , 10 वर्ष पूर्व विवाहित होकर आयी । बच्चा न होने के कारण वह उसे मुजफ्फरपुर ( बिहार ) की एक अनुभवी नारी रोग विशेषज्ञ से वर्षों तक चिकित्सान्तर्गत भी असफल रही । उस गेनीकोलॉजिष्ट के अनुसार उसका यूट्रस छोटा था , इस हेतु गर्भ टिकने पर भी Abortion हो जाने का भय बताया गया । तब से वह निराश रहने लगी ।
एक दिन उसका पति उसे अपने घर पर मझ से दिखलाया । उसमें मासिक से सम्बन्धित कुछ लक्षण पाये गये । मासिक का स्राव गाढ़ा , काला , लसीला और दर्द के साथ प्रचूर मात्रा में होता था । सर्व प्रथम तो उसे कालोफाइलम ही दिया गया बाद में क्रोकस सैटाइवा भी दोनों की शक्ति मात्र 200 ही । दवा करीब चार महीना चली । तब वह गर्भवती थी । उसे पेट में बहुत जलन के साथ के के लक्षण गम्भीर पाये गये । इसके लिए पहले सिम्फोरिकार्पस 200 फिर Cereum Oxalicum 200 देना पड़ा । नॉर्मल डेलिवरी हुयी अभी बच्चा साल पूरा कर चुका है , स्वस्थ है । उसने आकर मिठाई खिलाई ।

CASE NO.- 5

किस्मत 28-30 वर्ष की नाटा महिला , परिवार से निर्धन , सन्तान न होने से परिवार की प्रताड़ना और स्वयं दुखी चिन्तिन रहा करना , जीवन भार अनुभवकर रही की । चिकित्सा तो पटना की मशहूर नारी रोग विशेषज्ञ के द्वारा हुयी । तथापि लेडी डाक्टर अन्त में उसे गोद लेने की सलाह देकर चिकित्सा बन्दकर दी ।
अब तो उसके एक सम्बन्धी जो मुझ से परिचित थे , मिले और उसकी चर्चा के साथ उसे देखने का अनुराध किया । मैन बुलाने को कहा- देखा जाय , रोगी में क्या है , उसकी वजह तो जानूँ ।
देखने पर मै आश्वासन क्या देता । एक औथोरिटी के पास से लौटी थी । मुझे क्या देखना । होमियो पैथ होने के नाते कुछ लक्षणों की चर्चा की और उसमें कुछ विकार पाया गया । मैने इतना ही कहा कि जा विकार मुझे आप में मिला उसे सुधारना जरूरी समझता हूँ । उतना अगर ठीक हो जाय तो आगे ईश्वर की कृपा पति के जाँच रिपोर्ट सही थे । स्वप्न में वह गाद में सोया बच्चा देखती थी । पेट्रोलियम ( Im ) शक्ति दो खुराके ल्युकोरिया के साथ खुजलाहट के लिए सिपिया 1m सप्ताह में एक बार तीन माह के बाद वह गर्भवती पायी गई । मौर्निग सिकनेस के लिए सिम्फोरिकार्पस 200 दिया गया । जल्दी लाभ न पाकर किसी के बहकावे में एक पास की महिला डाक्टर से मिली ।
उसने भी दवा की , किन्तु फल नकारात्मक पाकर पटना के लिए रेफर कर दी । डाक्टर उसे अपने कब्जे में ले लिए । पता चला कि वहाँ ऑपरेशन से बच्ची जन्म ली जिसे ICU में रखा गया । लेकिन वह एलोपैथिक चमकदमक में भी हाथ न आ सकी ईश्वर की जो मर्जी । मैं तो सेवक हूँ ।

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