Wed. Feb 1st, 2023

हैनिमैन महोदय का जन्मदिन
 डा . जी . भक्त

 प्रायः महान व्यक्तियों की जन्मतिथि मनाई जाती है | उत्साहपूर्वक और भक्ति पूर्वक हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं । इस वर्ष कोरोना वाइरस के कारण लॉक डाउन एवम् डिस्टेन्सिंग का पालन करते हुए समारोह का आयोजन नहीं कर रहे किंतु उनके द्वार्व प्रदत्त होमेयोपैथिक चिकित्सीय ज्ञान वैभव का लाभ समाज को पहुँचाकर मानवता की सेवा अर्पित कर उनकी सही श्रद्धांजलि दे सकते हैं | मैने इस संबंध में पूर्व में लिखा था की आयुष ( होमियो० ) द्वारा तथा चिकित्सकों , कॉलेज के व्याख्याताओं तथा सरकारी सेवारत , व्यवसायरत होमेयोपैथ गण अपने अपने स्तर से कोरोना पर सकारात्मक पहल की बात सोचें एवम् हैनिमैन जन्मदिन 10 एप्रिल को जनता के हितार्थ साझा करें ।
 आज होमेयोपैथी के क्षेत्र से इस विषय पर विशेष कुछ व्यवस्थित ढंग से जनता के बीच होते न दिखा | न इसके निषेधात्मक न निवारणात्मक ही कोई मार्गदर्शन विभागीय तौर पर सामने आया | सिर्फ आयुर्वेद के वैसे टिप्स बतलाए गये जिनका प्रयोग सर्दी खाँसी जनित रोगों के बचाव के लिए किए जाते हैं | इलाज के तौर पर किसी ने कुछ खास निर्देश या जानकारी प्रस्तुत नहीं की जो कुछ हुआ , अबतक रोगियों की देखभाल पारम्परिक जानकारी के आधार पर स्वास यंत्र के रोगों के बचाव एवम् इलाज के लिए जो प्रचलित है उसीका व्यवहार हुआ , विशिष्ट कुछ भी नहीं |
 अब तक विश्व स्तर पर सुना जा रहा है की चीन इसमें सुधार पाया है | अन्य देशों में बड़े एवम् विकसित देश भी परेशान हैं | भारत की दशा सुधरी तो नहीं कही जा सकती किंतु यहाँ अब तक जो संक्रमण मिला था वह प्रवासियों के स्थानांतरण से पाया गया था जिनमें से कुछ की मृत्यु भी हुई । अन्य की दशा सुधरी | अब एक विषय यह रहा की मुस्लिम धार्मिक समारोह से जुड़े देशी और विदेशी प्रतिनिधियों की संदिग्ध उपस्थिति से जो नया परिवेश पैदा हुआ वह पुन : परेशानी पैदा किया | यह हमारे सोचने के लिए बाध्य करता है की हर क्षेत्र के चिकित्सक एवम् औषधि अनुसंधान कर्ता , केंद्रीय होमेयोपैथिक अनुसंधान पार्षद नयी दिल्ली सटीक चिकित्सा की खोज एवम् दवा पर शोध करें । हैनिमैन साहब को अमर बनाना है तो विश्व के मानवता के हित में होमेयोपैथी को हमेशा अपनी क्षमता बढ़ाकर जीवित रखना होगा |
 मैने ” गुगल्स पर – myxitiz.com पर लगातार इससे संबंधित जानकारी साझा करता आ रहा हूँ | आयुष , सचिव महोदय को भी निवेदित किया हूँ किंतु इस बिंदु पर मुझे अब तक कुछ भी जानकारी न मिल पाई है | सार्वजनिक निर्देश या वक्तव्य भी न सुना गया है | उनसे भी मेरा पुनः आग्रह होगा की इस नाजुक समय में उनका निर्देश देश तथा चिकित्सक सह चिकित्सा क्षेत्र के लिए महत्व की बात होगी । आशा है की श्रीमान का वक्तव्य कोरोना पीड़ित देशों के लिए सहारा बन सकेगा |
 सच्चाई है की कोरोना वाइरस से संक्रमित रोगी में जो लक्षण पाए गये एवम् जिन कारणों से मृत्यु हुई जो जाँच से पता चला , उनकी जानकारी होमेयोपैथी की जानकारी में आना आवश्यक होता , क्योंकि यह पद्धति इलाज की दिशा में बढ़ने के लिए रोज लक्षणों को ही प्राथमिकता देती है साथ ही जो लक्षण प्राय : रोगियों में समग्रता से पाए जाते हैं उनको ही ध्यान में लेकर संलक्षण संपन्न दवा ही रोक थम के लिए प्रयुक्त होती है जिसे ” जेनियस एपिडेमिक्स ” कहा जाता है | अबतक जो जानकारी सामने आई है उसमें मुख्यतः श्वास यंत्र के उपरी अंग ही प्रथमताया प्रभावित होते हैं , जैसे नाक , गला , वायूनली एवम् अंत में फेफड़ा | सर्दी जुकाम श्लेष्मा का साद , छिंके आना , खाँसी , श्वास कष्ट उच्च ताप श्लैष्मिक झिल्ली की सूजन , कष्ट , स्वररोध , श्लेष्मा का एकत्र जमा रहकर वायूनली में रुकावट आना आदि लक्षण पाए गये थे | वायूनली के अवरोध के कारण ऑक्सिजन न मिलने से शीघ्र मृत्यु होना पाया गया ।
 यहाँ पर श्वास यंत्र पर
1 . हमला ,
2 . सर्दी जुकाम ,
3 . छींक आना ,
4 . उच्च ताप ,
5 . खाँसी ,
6 . श्वासरोध ,
7 . स्वररोध एवम्
8 . गले में श्लेष्मा एकत्र पाया जाना |
इसके संक्रमित रोगी की मृत्यु का होना भी एक प्राणघातक लक्षण है | जिसका कारण श्वास नली का प्रदाह ( BRONCHITIS ) है।
 इन लक्षणों पर होमेयोपैथी में लक्षणन्सार विशिष्ट दवाएँ हैं । इनका स्पष्ट निर्देश होमेयोपैथी में हैं | परीक्षित एवम् अनुभूत दवाएँ हैं ।
 अगर हम वाइरस को प्रधान मानते हए इस संक्रमण की चिकित्सा एवम् प्रतिषेधक दवा का प्रचलन चाहते हैं तो उसके लिए भी अबतक के प्रयोग में दवाएँ कारगर रूप में उतार गयी हैं |
 ” हिप्पोजेनियम ” की दवा के संबंध में डा . जे . जे . गर्तविल्किंसन द्वारा प्रस्तुत एक शक्तिशाली नोसोड दवा है । इसके लिए बोरिक मैटेरिया मेडिका ( हिन्दी एडिसन ) प्रकाशक हैनिमैन पब्लिशिंग कंपनी कलकत्ता के पृष्ठ 376 में उपलब्ध है जानकारी के लिए पढ़ें | श्वास यंत्र – में देखें – अधिक उम्र के लोगों में खासकर लाभकारी है | सभी लक्षणों का प्रतिनिधित्व करता है ।
 उसी दवाके संबंध में पूर्व में उसी साइट पर इसे अंग्रेज़ी एडिसन ” ए डिक्शनरी इन प्रैक्टिकल मैटेरिया मेडिका ” डा . जे . एच . क्लार्क के प्रथम खंड के 609 पृष्ठ में निर्देशित है | तुलना मुसक मैटेरिया मेडिका – एम . भट्टाचार्य एंड कंपनी नेताजी सुभाष रोड कलकता से प्रकाशित अंतिम खंड के 3424 पृष्ठ पर इसी दवा को देखा जा सकता है | इसे डा . एन . सी . घोषजी ने अपनी कमपेरेटिव मैटेरिया मेडिका में भी परिशिष्ट में लिखा है | इसके संबंध में बोरिक ने म्यूकोटक्सिन ( माइक्रोकॉकअसिस कैट्रालिस रोगाट ) से डा . कौहीस द्वारा प्रस्तुत किया गया औषध है | क्रिएदलैंडर द्वारा निर्देशित न्यूमोनिया के रोग की जामू तथा माइक्रो काकक्स टेट्रजीनियस बच्चो तथा बूंदो के नये और पुराने शोथयुक्त स्ताको के उपयोगी है ।
 इससे मिलती जुलती दवाए ऑरम , केलिबाई , सोरिनक एवं वेयिसिलीनम पर भी ध्यान दे | प्रायोजनीय दवाओ की सूची पिछले दिस्पैच के मेरे साइट पर पाएँगे | आशा है । विश्व तथा भारत के भी होमियोपैथिक चिकित्सक इसपर सर्व सम्मति राय सेमिनार करके | साझा करे तो वर्तमान समस्या से लड़ने मे साथ मानी जीवन मे आनेवाली संभावित घटनाओ के लिए यह प्रचार एवं मिल का पत्थर सिद्ध हो पाए |

जय हैनिमैन,
 जय होमियोपैथ ॥


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