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    विश्व के धरातल पर पशु चिकित्सा महाविद्यालय की पंचवर्षीय पढ़ाई की शुरूआत उपयोगी एवं जनहितकारी

    विश्व के धरातल पर पशु चिकित्सा महाविद्यालय की पंचवर्षीय पढ़ाई की शुरूआत उपयोगी एवं जनहितकारी

    हनिमैन ने स्वयं लिखा था कि होमियोपैथी मानव से जुड़े जीव की बिमारियों में भी काम आयेगी वह लेख डा० जी० भक्त ने 1997 की LHMI द्वारा अयोजित अन्तर्राष्ट्रीय कॉग्रेस नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पढ़ा था। विषय था होमियोपैथी इन वेटोनरी मेडिसीन। डा० जी० भक्त ने अपनी प्रैक्टिस का अनुभव दर्शाते हुए अपना आर्टिकल उस कॉग्रेस में प्रस्तुत किया था। उसके पहले ही उन्होनें भारत सरकार CCH के डायरेक्टर को होमियोपैथोक द्वारा पशुओं की चिकित्सा की पढ़ाई की व्यवस्था हेतु कालेज खालनी चाहिए ऐसा कहा था। वह आयोजन 1977 के अक्टूबर में हुआ था उसके पूर्व ही 1976 में डा० जी० भक्त ने एक प्रोजेक्ट चलाने का विषय उढ़ाते हुए CCH तथा CCRH को आवेदन कर प्रस्ताव डाला था। उसी की चर्चा आगे दिन हरियाणा में सेमिनार के उवसर पर इस विषय का आर्टिकल के रूप में प्रस्तुत कर इसकी चिकित्सा इसकी पढ़ाई की वयवस्था को उपयोगी और आवश्यक बतलाते हुए कॉलेज चलाने की बातें कही।

    सवाल उढता है कि होमियोपैथिक दवाओं का प्रयोग कर रोग में इस प्रणाली वाले लाभउढ़ा रहे हैं। वह निरापद और आरोग्यकारी साबित कर दिया गया है। CCRH के द्वारा इसकी घोषणा की जा चुकी हैं। आयुष की सरकार सृजित की गयी हैं। 2009 में इसक स्वकृति मिल जाने के बाद सरकार चुप क्यों रही अगर VCI की स्थापना करना था तो एलोपैथ जो होमियोपैथ चलाते और चिकित्सा का लाभ पाते हैं उनके लिए तथा होमियोपैथो वाले पशुओं के लिए पेटेन्ट दवा बनाकर प्रयोग हेतु बाजार म चला रहे हैं। समाज की इससे जब सही तौर पर लाभ मिल रहा है तो उन्होंनें सिलेबस तक बना कर CCH को सुपूर्द कर चुके हैं। इसी हेतु भक्त जी ने 23 मई के अपराहन में एक बैठक बुलाकर बेलसर प्रखण्ड के नौ पंचायते के मुखिया गणों के बीच इसकी सहमति पायी तथा अपनी संस्था द्वारा इसकी तैयारी में जुड़ जाने की स्वीकृति पा ली हैं। प्रस्तावक डा० जी० भक्त की आयु 79 वर्ष की हो गयी है और वे इस कार्य में आज भी 50 वर्षों से लगे हुए हैं। इसकी प्रति LHMI को भी भेज कर सूचित की जा रही हैं। यह जनहित में परमावश्यक हैं।

    बठक का समापतित्व टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज सोरहत्था के प्राचार्य महोदय ने की।

    वीरेन्द्र यादव