Wed. Feb 1st, 2023

आधुनिक जीवन मेंश्रीमद्भगवद्गीता

(निष्पति व निवृत्ति)

लेखक- डा. जी. भक्त (राजेन्द्र चौक, हाजीपुर)

Book Details

A Book By: MY XITIZ LITERATURE / Authors Community /

Title:– Shrimad Bhagavad Gita

ISBN:– 9798888493465

Format:– Paperback

Book Size:– 5/8

Page Count:– 20

प्रकाशन

  • सत्र- 1987 संख्या 1000 प्रतियां
  • सत्र- 2021 संख्या  500 प्रतियां

प्रसार माध्यमस्थानीय विद्यालयों में

अनुसंशासराहनीय  

पुस्तक परिचय

आधुनिक जीवन में श्रीमद्भगवद्गीता (निष्पति एवं निवृत्ति)

लेखक– डॉ. जी. भक्त

मो. – 9430800409

अध्यक्ष– दि प्रोग्रेसिव साइंटिफिक मेडिकल एण्ड लिटररी रिसर्च फाउण्डेशन हाजीपुर, वैशाली (बिहार) 844101

विषय– आध्यात्म बोध

लक्ष्य – युवा एवं किशोर पीढ़ी में भारतीय मानवादर्श का दिग्दर्शन एवं अधिगमन का विस्तार ।

लेखक– डा. जी. भक्त

हाई स्कूल में आठवीं कक्षा के बहुत ही शैक्षणिक वर्ष में लेख लिखने में रुचि पैदा हुई, जिसके लिए मुझे समय-समय पर सम्मानित किया गया और इस प्रकार मेरी योग्यता बढ़ी और साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों पर किताबें और लेख लिखने के लिए अभी तक बनी हुई है जैसा कि आपने देखा है साइट गूगल अब एक दिन। एक शिक्षक, व्याख्याता और बाद में एक होम्योपैथिक चिकित्सक रहते हुए लेखन जारी रखा और इस प्रकार 1987 से अब तक 34 वर्षों के भीतर 15 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उन पुस्तकों की सार्वजनिक, स्कूलों और पुस्तकालयों में सुंदरता और उपयोगिता के लिए प्रशंसा की गई है। वे भारत के तीन राष्ट्रीय पुस्तकालयों के साथ-साथ स्थानीय जिला सरकार में भी उपलब्ध हैं। पुस्तकालय। हिंदी और अंग्रेजी, राजनीतिक, वैज्ञानिक, साहित्यिक और अन्य क्षेत्रों में प्रकाशित होने वाली (तैयार) पुस्तकें, 40 से अधिक लिपियों को अद्यतन किया गया।

लेखक के दो शब्द

लेखक की अखण्ड साधना का प्रसाद श्रीमद्भगवद्गीता (निष्पत्ति और निवृति) आपके समक्ष है, इनकी खंडित अभिव्यक्ति में आत्मस्तुति, प्रस्तुति, विस्तृति, निष्पत्ति तथा निवृति जो एक पुस्तकाकार में गीता बोध आपकी आकांक्षा की प्रतीक्षा करेगी, प्रकाशनार्थ परिशोधन में हैं । गीता द्वारा जनसामान्य के लिए बोध गम्यता तथ युवा पीढ़ी के लिए आत्म बोध एवं दिशा बोध प्रदान करना ही अभीष्ट है । मेरी कामना है कि यह असंख्य करों में धारण की जाय तथा हृदय में स्थान पाये । उपलब्ध तो हम सबों की होगी इन्हें मात्र निर्माण का ही आनन्द प्राप्त होगा ।

पुस्तक समीक्षा

आधुनिक जीवन में “श्रीमद्भग्वद्गीता” (निष्पत्ति व निवृति) लेखक:- डा० जी० भक्त

विश्व वाड्मय के समस्त ग्रंथादि विचारों की श्रृंखला और अनुभूतियों की कल्याण कारी ज्ञान गाथा कही जा सकती है। विचार से ही निर्माण सम्भव है। विचार ही उभर कर सृष्टि के धरातल पर अपने उद्देश्य को सार्थक स्वरूप देता है।

भारतीय आई परम्परा ने अपने प्रस्फुट विचारणाओं द्वारा सृष्टि के चराचर जगत के मार्ग दर्शन उसे कृतार्थ कर एक संस्कृति रच दी। आज विश्व उसका पुजारी बना तो अवश्य, किन्तु उसके ज्ञाता और अधिष्टाता व्यक्ति विशेष ही रहे। यहाँ तक कि अपने देश में भी जन सामान्य के कानों तक पहुँच तो हो पायी किन्तु इस अनुपम वैभव को आत्म सात न कर पाये न उसका लाभ ही मिल पाया।

गीता की पुस्तकें अनेक है उसके भाष्य भी विसार भी भावार्थ भी किन्तु मैनें डा. जी. भक्त द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त पुस्तक जो मात्र 20 मिनट में पढ़ी जाने वाली और चन्द पंकियों में गीता के सार को हृदयंगम कर पाने का लक्ष्य पा लेने का सुअवसर पाया इसके लिए कृतक्ष हूँ।

डा. जी. भक्त ने गीता की निष्पति और उससे मिलने वाली निवृत्ति के यथार्थ और तत्वार्थ को मानस में पूजामृत घोलने का जो कार्य किया है, जिससे गीता के अध्ययन का मार्ग सहज हो जाता है और जीवन में उसकी नितान्तता के साथ उपयोगिता के प्रति जागरूकता जगाने का एक अध्याय शुरू हो रहा है। नई पीढ़ी के बाल और युवा अपने प्रारंभिक (प्रवेशिका स्तर तक के) शिक्षण काल में कुछ ही मिनट का समय गीता के अध्ययन में जोड़ पायें तो गीता जन-मन में व्याप्त पायी जा सकती है पूज्य बापू ने विलायत में वैरिस्टरी के अध्ययन काल में मात्र एक श्लोक प्रतिदिन मुँह में ब्रश करते समय याद करने का संकल्प साकार कर गीता के सात सौ श्लोकों को कठस्थ कर पायें नार्थ के साथ।

डा. जी. भक्त जी का यह प्रयास “गुगल्स के माध्यम से विश्व के धरातल पर गीतामृत घोलने का सुनहला विहान बन सकता है। जीवन को ज्योतिर्मय स्वरूप देने में जो बाधाएँ हमें विमूढ बना डालती है जैसा अर्जुन के साथ कुरु क्षेत्र में हुआ, कृष्ण भगवान ने गीता का ज्ञान देकर दिल के अन्दर के दुश्मनों के दूर भगाकर निवृति दिलायी उत्ती का अभियान आज डा. जी. भक्त की लघु पुस्तक द्वारा “आमेजन” और “फिलिप कार्ट के माध्यम से 99 स. में उपलब्ध है. शुरू है उस पवित्र सह जीवन दायक अभियान से जुड़ने में देर न करनी चाहिए।

आपका शुभैषी
पंडित ललन विचारी
अवकाश प्राप्त शिक्षक
बहिलवारा मुजफ्फरपुर, बिहार

विषय सूची

     सं०   शीर्षक

  1. समर्पण
  2. पुस्तक परिचय
  3. ज्ञापन
  4. लेखक के दो शब्द
  5. निष्पत्ति
  6. निवृत्ति 

Also Available On

श्रीमद्भगवद्गीता

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